RAIPUR. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित टूरिज्म कॉन्क्लेव-2022 में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के मोंगली कहे जाने वाले टाइगर ब्वॉय चेंदरू की मूर्ति का अनावरण किया। इस मूर्ति में चेंदरू के साथ उसका टाइगर मित्र टेंबू भी है। इस अवसर पर बच्चों को भी छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र से जोड़ने और बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक टॉकिंग कॉमिक्स को लांच किया गया। इस कॉमिक्स में चेंदरू और टेंबू को छत्तीसगढ़ के पर्यटन आइकॉन के रूप में दर्शाया गया है, जिसके माध्यम से देश के बच्चों को प्रदेश के पर्यटन स्थल से अवगत कराया जाएगा। आइए जानते है चेंदरू और ये टेंबू कौन है…
अबूझमाड़ का बालक, दुनिया में छाया, बना मोंगली

चेंदरू द टाइगर ब्वॉय
अपनी संस्कृति, आबोहवा और अबूझ पहले के लिए लोकप्रिय बस्तर के नारायणपुर का अबूझमाड़ का लड़का चेंदरू… चेंदरू बाघ (टाइगर) के साथ खेलता था। अबुझमाड़ के प्रवेश द्वार ग्राम गढ़बेंगॉल का यह लड़का शेरों के साथ खेलता था। इस लड़के का नाम था चेंदरू..‘चेंदरू द टायगर ब्वॉय’ के नाम से मशहूर पुरी दुनिया के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था। बस्तर मोंगली नाम से विख्यात चेंदरू पुरी दुनिया में 60 के दशक में बेहद ही मशहूर था।

चेंदरू मंडावी नारायणपुर ज़िला मुख्यालय अबुझमाड़ जाने वाले मार्ग पर सात किलोमीटर दूर गांव गढ़बेंगाल का रहने वाला था। मुरिया जनजाति से ताल्लुख रखने वाला चेंदरू अपनी बहादुरी के लिए विख्यात था। बचपन में इसके दादा ने जंगल से बाघ के शावक को लाकर इसे दे दिया था।
चेंदरू ने उसका नाम टेंबू रखा था। इन दोनों की पक्की दोस्ती थी। दोनों साथ में खाते, घुमते और खेलते थे। इन दोनों की दोस्ती की जानकारी धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गई। स्वीडन के ऑस्कर विजेता फिल्म डायरेक्टर आर्ने सक्सडॉर्फ ने चेंदरू पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया और चेंदरू के गांव पहुंच गए।
उन्होंने चेंदरू के किरदार को निभाने के लिए चेंदरू को ही चयनित किया और बस्तर में दो वर्ष तक फिल्म की शूटिंग की। 1957 में चेंदरू पर केंद्रित फिल्म ‘एन द जंगल सागा’ जिसे इंग्लिश में ‘दी फ्लूट एंड दी एरो’ के नाम से रिलीज हुई।

चेंदरू को गोद लेना चाहते थे स्वीडन के फिल्म निर्माता
फिल्म के रिलीज होने के बाद चेंदरू को स्वीडन सहित अन्य देशों में ले जाया गया। उस दौरान वह महीनों विदेश में रहा। चेंदरू को आर्ने सक्सडॉर्फ गोद लेना चाहते थे लेकिन उनकी पत्नी एस्ट्रीड से उनका तलाक हो गया, जिसकी वजह से गोद लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
चेंदरू पर केंद्रित पुस्तक का हुआ प्रकाशन
एस्ट्रीड एक जानी-मानी फोटोग्राफर थी। पति के फ़िल्म शूटिंग के समय उन्होंने चेंदरू की कई तस्वीरें खीचीं और एक किताब ‘चेंदरू द बॉय एंड द टाइगर’ का प्रकाशन भी किया।
नेहरू ने पढ़ने कहा, पिता ने बस्तर वापस बुलाया
उसकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से हुई। नेहरू ने चेंदरू को पढ़ने के लिए कहा पर चेंदरू के पिता ने उसे बस्तर वापस बुला लिया। वहां से वापस लौटकर वह फिर से अपनी गुमनामी की जिंदगी में लौट गया, चकाचौंध, ग्लैमर भरे जीवन में रह चुका चेंदरू गांव में गुमसुम रहने लगा था।
गुमनाम चेंदरू को पत्रकारों ने पुन: किया जीवित
एक समय ऐसा आया जब दुनिया से गुमनाम हो चुके चेंदरू को 90 के दशक में कुछ पत्रकारों ने खोज निकाला। 18 सितंबर 2013 में लंबी बीमारी लड़ते हुए गुमनाम हीरो मोंगली का निधन हो गया।





































