तीरंदाज न्यूज। इराक के प्रभावशाली शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र ने सोमवार को राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि, उन्होंने अपने कार्यालयों के बंद होने के बारे में विस्तार से नहीं बताया। मगर, कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थान खुले रहेंगे। इसके बाद से सेना ने कर्फ्यू लगा दिया है। हालांकि, अल-सद्र के समर्थक सड़क पर उतर आए हैं और जगह-जगह जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं।

मुक्तदा अल-सद्र इराक में एक प्रभावशाली शिया धर्मगुरु हैं और राजनीतिक रूप से भी बहुत सक्रिय हैं। सोमवार को एक ट्वीट में मुक्तदा अल-सद्र ने राजनीति से संन्यास लेने और अपने पार्टी दफ्तरों को बंद करने की घोषणा की। इसके बाद मुक्तदा अल-सद्र के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गए। इसे देखते हुए इराकी सेना ने सोमवार शाम चार बजे से देशव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की है।

इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के पतन के बाद, अल-सद्र 2003 तक सुर्खियों में आ गए थे। वह ग्रैंड अयातुल्ला सैय्यद मुहम्मद-सादिक अल-सद्र के पुत्र हैं, जिनकी 1999 में सद्दाम हुसैन ने हत्या करा दी थी। शिया समर्थन के साथ वह धीरे-धीरे इराक का सबसे चर्चित चेहरा बन गए।

तब से अल-सद्र ने दशकों के संघर्ष और प्रतिबंधों को दूर करने और सांप्रदायिक संघर्ष, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए इराक में अपने समर्थकों के साथ आंदोलन किया है। इतना ही नहीं, अल-सद्र ने अमेरिका और ईरानी प्रभाव का विरोध करके देश में व्यापक समर्थन प्राप्त किया।

हालांकि अल-सद्र की पार्टी ने पिछले अक्टूबर के चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतीं। मगर, बहुमत तक पहुंचने में विफल रही। इसके बाद देश में राजनीतिक गतिरोध और बढ़ गया। इराक में पिछले दस महीनों से कोई स्थायी प्रधान मंत्री, कोई कैबिनेट और कोई सरकार नहीं है।





































