रायपुर। अगर आप को बिरजू महाराज को एक कथक नर्तक के रुप में ही जानते है तो आपको बता दें कि बिरजू महाराज एक अच्छे गायक भी थे। आपको बतादें कि 2019 अहमदाबाद में आयोजित सप्तक वार्षिक संगीत समारोह में उन्होंने अपनी इस प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया था।
उन्होंने जिस तरह से गायन का प्रदर्शन किया था, उससे लगा मानों वो रोज गायिका का रियाज करते हो। बिरजू महाराज एक निपुण गायक भी हैं और ठुमरी तथा दादरा (शास्त्रीय गायन के प्रकार) का उनका गायन सराहा गया है। वह नाद, तबला और वायलिन बजाते हैं। उन्होंने सत्यजित राय द्वारा निर्देशित फ़िल्म शंतरंज के खिलाड़ी में दो शास्त्रीय नृत्य दृश्यों के लिये संगीत रचा और गायन भी किया।
पद्म विभूषण से सम्मानित बिरजू महाराज ने 83 वर्ष की आयु में दिल्ली स्थित निवास में अंतिम सांस ली। बिरजू महाराज को कथक का पर्याय भी कहा जाता है। 4 फरवरी 1937 को जन्मे बिरजू महाराज लखनऊ के कालका बिंदादीन घराने के सदस्य थे। उनका नाम बृजमोहन नाथ मिश्र था। उनका परिवार प्रसिद्ध कथक नर्तक परिवार है।
आपको बता दें कि बिरजू महाराज कथक नर्तक के साथ-साथ गायक भी थे वह भी शास्त्रीय गायक। बिरजू महाराज के परिवार में कथक पीढ़ी दर पीढ़ी चला रहा था। बिरजू महाराज के पिता उनके चाचा उनके भाई सभी प्रसिद्ध कथक नर्तक थे। बिरजू महाराज पिछले कुछ दिनों से बीमार भी थे। पर यह बताया गया कि उनकी हालत में सुधार हो रहा था। बीती रात को अपने पोते के साथ खेल रहे थे और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
बिरजू महाराज को पद्म विभूषण संगीत नाटक एकेडमी कालिदास सम्मान और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, खैरागढ़ विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। बिरजू महाराज के निधन के साथ ही शास्त्रीय घरानों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर है।

































