वेश्यावृत्ति को पेशे का दर्जा देने के बाद क्या होगा असर, एक्सपर्ट से जानें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मायने

तीरंदाज, डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले एक बड़ा निर्णय लेते हुए वेश्यावृत्ति को पेशे का दर्जा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद एक ओर जहां सैक्स वर्करों में खुशी का माहौल है वहीं एक असमंजस की स्थिति भी है कि क्या शीर्ष कोर्ट के आदेश के बाद इस पेशे से जुड़ी युवतियों व महिलाओं के जीवन में सुधार आएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस द्वारा अभी जिस प्रकार से सैक्स वर्करों को परेशान किया जाता है क्या अब भी उन्हें इसी तरह से परेशान किया जाएगा।

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति के संदर्भ में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों से कहा है कि हर पेशे की तरह बुनियादी सुरक्षा यौन कर्मियों के लिए भी है। पुलिस और प्रशासन को यौन कर्मियों यानी सेक्स वर्कर्स के साथ भी आम नागरिक की भांति सम्मानजनक बरताव व्यवहार करना चाहिए। यानी उनके साथ पुलिस मौखिक या शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार न करे।

भारतीय दंड संहिता (IPC) के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर वेश्यावृत्ति, होटलों में वेश्यावृत्ति, एक सेक्स वर्कर की व्यवस्था करके वेश्यावृत्ति में शामिल होना, एक ग्राहक के लिए यौन क्रिया की व्यवस्था करना आदि दंडनीय है। इसके अलावा सैक्स वर्कर खुद के साथ संबंध बनाने कहती हैं या दूसरों को बहकाते हुए पाई जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कॉल गर्ल को अपने फोन नंबर सार्वजनिक करने की मनाही है। ऐसा करते पाए जाने पर उन्हें 6 महीने तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है। यानि एक तरह से वेश्यावृत्ति को गैरकानूनी की श्रेणी में रखा गया है।

शीर्ष कोर्ट का निर्देश के बाद यह होगा बदलाव
यौनकर्मियों को समान कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। यदि कोई सैक्स वर्कर किसी यौन शोषण से संबंधित अपराध की रिपोर्ट करता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी होगी। यदि किसी वेश्यालय पर छापा मारा जाता है, तो इसमें शामिल सैक्स वर्कर्स को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यौन उत्पीड़न का शिकार सेक्स वर्कर को चिकित्सा व अन्य जरूरी सेवाएं दी जाएंगी। पुलिस को सभी यौनकर्मियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना होगा और मौखिक या शारीरिक रूप से उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकते।

जहां वैश्यावृत्ति लीगल वहां रेप की घटनाएं कम
बिलासपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी कहते हैं कि एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जहां वेश्यावृत्ति को कानून की मान्यता है वहां पर रेप की घटनाओं में काफी कमी पाई गई है। न्यूजीलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस कनाडा जैसे देशों में इसे कानूनी मान्यता मिली हुई है। यहां बलत्कार का रेट बहुत ही कम हैं। कुछ देशों में तो सेक्स वर्कर्स के लिए सरकारी योजनाएं भी चलाई जाती है। जैसे स्वास्थ्य बीमा जैसी स्कीम दी जाती है।

इच्छा से करने वालों पर नहीं करनी है कार्रवाई
दुर्ग एसपी डॉ अभिषेक पल्लव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की दिशा निर्देश अभी पुलिस तक नहीं पहुंचा है। प्रारंभिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि स्वेच्छा से इस काम को करने वालों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी। लेकिन इस दलाल किश्म के लोगों व जबरन इस काम में धकेलने वालों पर कार्रवाई होगी। जो सेक्स वर्कर अपनी मर्जी से यह काम कर रही है उस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करनी है लेकिन उन्हें इस काम से बाहर निकालने में पुलिस को मदद करनी है। एसपी ने कहा कि अभी इस मामले ज्यादा बातें क्लीयर नहीं है गृहमंत्रालय से गाइडलाइन आ जाए तो स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

इस पेशे को अपनाने के पीछे गरीबी व अशिक्षा बड़ा कारण
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा का कहना है कि इस पेशे को अपनाने के पीछे गरीबी और अशिक्षा बड़ी वजह है।  लेकिन हाल के समय में ऐसा नहीं है इसमें उच्च शिक्षित महिलाओं के कदम भी बढ़े हैं। इस पेशे जुड़ी महिलाएं   वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार के साथ जोड़कर तर्क प्रस्तुत कर रही हैं। शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यौनकर्मी भी सम्मानजनक जीवन जीने और समता का अधिकार हासिल करने के अधिकारी हैं। न्यायालय ने वेश्यावृत्ति को अन्य व्यवसायों की भांति एक व्यवसाय माना है और कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वेच्छा से अपना पेशा चुनने का अधिकार है।