धरसींवा कॉलेज के मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम में क्या सीखा, उसकी हुई परीक्षा

शासकीय पण्डित श्यामाचरण शुक्ल महाविद्यालय धरसींवा में चल रहे 11 दिवसीय मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम का समापन

शासकीय पण्डित श्यामाचरण शुक्ल महाविद्यालय धरसींवा के मूल्यवर्धित कार्यक्रम के समापन पर आयोजित परीक्षा में शामिल विद्यार्थी।

धरसींवा (Raipur)। शासकीय पण्डित श्यामाचरण शुक्ल महाविद्यालय (Government Pandit Shyamacharan Shukla College) के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित 11 दिवसीय मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम का आज समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रतिभागियों की परीक्षा हुई। इसमें 11 दिन में सिखाईं गईं बातों के बारे में सवाल पूछे गए। 15 नवंबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की ओर से हर रोज एक विषय विशेषज्ञ से छात्र-छात्राओं का साक्षात्कार कराया गया। इसके अलावा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का भ्रमण और प्रिंटिंग प्रेस का भी शैक्षणिक भ्रमण कराया गया।

महाविद्यालय के 11 दिवसीय मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम के संयोजक डॉ. सीएल साहू ने कार्यक्रम के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर से प्रारंभ हुए इस पाठ्यक्रम में पत्रकारिता से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान कराए गए। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व न्यू मीडिया के जाने माने पत्रकारों, संवाददाताओं से छात्र-छात्राओं को सीखने के अवसर दिए गए। छात्र-छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों का साक्षात्कार लेने का भी मौका दिया गया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन शनिवार को पत्रकारिता से जुड़े प्रश्न जैसे-समाचार के मूल तत्व क्या हैं? संवाददाता किसे कहते हैं? वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है? समाचार के छ: प्रकार कौन से हैं? ड्राई एंकर कौन होता है? इंटरनेट पत्रकारिता क्या है? सम्पादकीय में लेखक का नाम क्यों नहीं दिया जाता? इस तरह के प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों के ज्ञान व समझ की परीक्षा ली गई।

परीक्षा के परिणाम व किसी विषय पर समाचार लेखन व प्रतिदिन के प्रतिवेदन लेखन के परीक्षण उपरांत सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेंगे। कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्ना होने पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद शर्मा ने सभी विशेषज्ञों डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, डॉ. गिरिजाशंकर गौतम, डॉ भूपेन्द्र करवन्दे तथा सभी पत्रकारों डॉ. राकेश पांडेय, मयंक चतुर्वेदी मानस, विजयकांत दीक्षित, प्रफुल्ल वर्मा तथा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोगियों का कार्यक्रम संयोजक ने धन्यवाद दिया।