केन्द्रीय वित्त मंत्री से वर्चुअल बैठकः मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति मांगी

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से राज्य से उसना चावल न लेने के निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया, छत्तीसगढ़ के हिस्से की कोल पेनॉल्टी 4140 करोड़ रुपए वापस लौटाने का अनुरोध किया। वहीं पेट्रोल-डीजल पर सेस कम करने की बात रखी।

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपने निवास कार्यालय से केंद्रीय वित्तमंत्री (Union Finance Minister) डॉ. निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) की बैठक में वर्चुअल (virtual meeting) रूप से शामिल हुए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से राज्य के कई वित्तीय मामलों पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के हिस्से की कोल पेनॉल्टी (coal penalty) 4140 करोड़ रुपए वापस लौटाने का अनुरोध किया। वहीं पेट्रोल-डीजल पर सेस कम करने की बात रखी।

एथेनॉल निर्माण की तैयारी पूरी, अनुमति की जरूरत
मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में निर्धारित पूंजीगत व्यय के 35 प्रतिशत लक्ष्य को पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को धान का कटोरा (rice bowl) कहा जाता है। यहां विपुल मात्रा में धान का उत्पादन होता है। दो-तीन वर्षों से धान से बॉयो एथेनॉल (bio ethanol from paddy) निर्माण की अनुमति देने का आग्रह किया जा रहा है। तैयारी कर ली गई है। इससे विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

केंद्र के निर्णय से 500 मिलें हो जाएंगी बंद
धान से एथेनॉल प्लांट (ethanol plant) लगाने के लिए 12 कम्पनियों से एमओयू भी किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में गन्ना और मक्का से एथेनॉल बनाने की अनुमति मिली है। धान के लिए भी अनुमति दी जाए। सीएम ने कहा छत्तीसगढ़ राज्य से उसना चावल न लेने का निर्णय केन्द्र सरकार ने लिया है। यह निर्णय राज्य, यहां के मिलर्स और श्रमिकों के हित में नहीं है। 500 उसना मिलें बंद हो जाएंगी। इससे मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे।

कोल पेनॉल्टी की राशि 4140 करोड़ वापस की जाए
मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में केन्द्रीय वित्त मंत्री (Union Minister) का ध्यान केन्द्र सरकार के सेन्ट्रल पूल में जमा छत्तीसगढ़ राज्य के हिस्से की कोल पेनॉल्टी की राशि 4140 करोड़ रुपए की ओर आकर्षित किया। राशि को लौटाएं जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले सेस को कम करने का सुझाव भी दिया, ताकि इनकी कीमतों में और कमी हो तथा इसका लाभ आम जनता को मिले। बघेल ने बताया पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी में कमी करने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ रूपए का घाटा हो रहा है।

15वें वित्त आयोग के राजस्व घाटे को परिवर्तित करने का आग्रह
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 15वें वित्त आयोग के राजस्व घाटे को अनुदान के रूप में परिवर्तित करने का अनुरोध किया। हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 17 राज्यों को एक लाख 18 हजार 552 करोड़ रूपए का अनुदान पिछले वर्षों में राजस्व घाटे की पूर्ति के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो राज्य वित्तीय व्यवस्था ठीक से नहीं रख पाए, उनको अनुदान मिलेगा और जिन राज्यों में वित्तीय व्यवस्था बनाकर रखी है, उनको कुछ नहीं मिलेगा, यह स्थिति उचित नहीं है। इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव उद्योग मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, वित्त सचिव श्रीमती अलरमेल मंगई डीसहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

(TNS)