आदिवासी नृत्य महोत्सव: आकर्षक वेशभूषा के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने झूमने पर किया मजबूर

त्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों और दूसरे देशों से पहुंचे नृत्य दलों ने अनेक तरह के पारंपरिक वेशभूषा में वाद्ययंत्रों के साथ रंगारंग आकर्षक प्रस्तुतियां दी। इस दौरान दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर रात तक कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे।

रायपुर। राजधानी रायपुर (Raipur) के साइंस कॉलेज मैदान (Science College Ground) में चल रहे राष्ट्रीय (National) आदिवासी नृत्य महोत्सव (Tribal Dance Festival) गुरुवार को देर रात तक चला। अनेक प्रांतों (provinces) से आए कलाकारों (artists) ने स्थानीय गीतों (songs) के साथ नृत्य से दर्शकों को बांधे रखा।

देर रात तक छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सहित देश के कई राज्यों और दूसरे देशों से पहुंचे नृत्य दलों ने अनेक तरह के पारंपरिक वेशभूषा (traditional costumes) में वाद्ययंत्रों (musical instruments) के साथ रंगारंग आकर्षक प्रस्तुतियां दी। इस दौरान दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर रात तक कार्यक्रमों का आनंद लेते रहे। गीत, संगीत की धुन में लोग डूबे रहे।

वैशभूषा को लोगों ने किया कैमरे में कैद

इस दौरान अतिथियों के साथ दर्शकों ने उत्साह के साथ कायर्क्रमों को कैमरे में कैद करते नजर जाए। इस दौरान राज्यपाल अनुसुईया उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री सहित अन्य अतिथियों कार्यक्रमों की सहाहना की। वहीं स्वाजीलैंड, उज्बेकिस्तान एवं माली देश सिहत मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के दल ने दर्शकों को अपनी संस्कृति एवं लोकनृत्य से रु-ब-रू कराया।


नृत्य से बताया खास अवसरों का महत्व

स्वाजीलैंड के दल ने अपने वीर सैनिक और योद्धाओं के शौर्य को समर्पित नृत्य की प्रस्तुति दी। स्वाजीलैंड के कलाकारों के जय जोहार और नमस्ते संबोधन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। उज़्बेकिस्तान के दल ने फसल कटाई के अवसर पर किए जाने वाले पारंपरिक परिधान और पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।

मध्य प्रदेश के सैला गेंडी नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र

राज्यपाल महोदया के क्षेत्र से आने वाले मध्यप्रदेश छिंदवाड़ा से आए लोक नृत्य दल की आदिवासी सैला गेंडी नृत्य की विशेष प्रस्तुति दी। छिंदवाड़ा के दल ने वाद्य यंत्रों और ताल से ताल मिलाते हुए संतुलन बनाकर सैला गेंडी नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

(TNS)