छत्तीसगढ़ में टीएमसी के विस्तार की तैयारियों ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता

रायपुर। आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छत्तीसगढ़ में भी ‘खेला’ कर सकती है। यहां टीएमसी ने अपने संगठन का विस्तार करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके लिए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के करीबी यहां कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के असंतुष्ट नेताओं को तोड़ने की कोशिश में लग गए हैं। बताते चलें कि टीएमसी मेघालय से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं को अपनी पार्टी में प्रवेश कराकर खेला कर चुकी है। इससे पहले ममता बैनर्जी ने शरद पवार के साथ मंच साझा करते हुए कहा था कि कांग्रेस है कहां?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ममता भाजपा व कांग्रेस से अलग तीसरा मोर्चा खड़ा करना चाह रही हैं। हाल ही में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार से उनकी मुलाकात इसी रणनीति का हिस्सा था। इस तीसरे मोर्चे में ममता अपनी स्थिति मजबूत रखना चाह रही है। इसके लिए वे पार्टी को क्षेत्रीय से राष्ट्रीय पार्टी का रुप देना चाह रही हैं। दरअसल, उनकी महत्वाकांक्षा बढ़ रही है और वह भाजपा के सामने मजबूत विपक्ष के रूप में कांग्रेस की जगह लेने के लिए उतावली हैं।
मतता बैनर्जी की इन कोशिशों से छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस के तनाव का बड़ा कारण यह भी है कि टीएमसी ने यहां पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी सुष्मिता देव को सौंपी है, जो महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकीं हैं। इस वजह से यहां के कांग्रेस नेताओं से उनकी अच्छी जान-पहचान है। उनके कुछ रिश्तेदार भी यहांं रहते हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के नेता राजनांदगांव जिले के एक कांग्रेस विधायक के साथ ही पार्टी संगठन के पूर्व और मौजूदा नेताओं से संपर्क किया है। इसमें प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महामंत्री अरुण भद्रा का नाम भी शामिल है। भ्रदा ने टीएमसी नेताओं के उनके संपर्क करने की बात स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि टीएमसी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। भद्रा ने बताया कि उन्होंने टीएमसी की तरफ से प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को तोड़ने की चल रही कोशिश के संबंध में प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सलाहकार को पूरी जानकारी दे दी है।
बंगाली वोटर्स पर नजर
प्रदेश बंगाली समाज की आबादी करीब 15 लाख तक है। दुर्ग, भिलाई, रायपुर, कांकेर, रायगढ़ और कोरबा समेत कई जिलों की कुछ सीटों पर चुनाव परिणाम को वे बदलने की ताकत रखते हैं। यही वजह है कि टीएमसी को प्रदेश में संगठन के विस्तार की अच्छी संभावना नजर आ रही है।