राज्य सरकार ने खींचा शिक्षा का खाका, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्कूल होंगे संचालित

रायपुर (raipur)। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) शासन ने शिक्षा (education) में नवाचार कर महत्वपूर्ण अधोसंरचना लागू कर रहा है। इसके तहत अंतराष्ट्रीय मानकों (international standard) के अनुरूप स्कूल संचालित किए जाएंगे। इस योजना में तीन साल बालवाड़ी का संचालन कर प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। वहीं 9 से 12 वीं तक रोजगारमूलक शिक्षा मिलेगी। इसका लक्ष्य 2030 तक रखा गया है।

रविवार को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शिक्षा समागम (National education conference) का शुभारंभ करते हुए यह बात मुख्यमंत्री (chief minister) भूपेश बघेल ने कही है। शिक्षा में नवाचार (innovation in education) के साथ ध्येय से आयोजित जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शिक्षा समागम कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा ( school education) मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ पंत, महापौर (Mayor) एजाज ढ़ेबर मौजूद रहे। वहीं नोबल पुरस्कार विजेता (Nobel laureate) अर्थशास्त्री (economist) अभिजीत बनर्जी कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

ऐसी अधोसंरचना जवाहरलाल ने शुरू की

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि शैक्षणिक और आर्थिक (educational and economic) रूप में महत्वपूर्ण अधोसंरचना जवाहरलाल नेहरू ने शुरू की। उसके लिए हमेशा उन्हें याद किया जाएगा। नेहरू कहते थे कि बच्चे कलियों की तरह हैं, ध्यान और प्यार से लालन पालन करना चाहिए। उन्होंने विज्ञान और अंग्रेजी की शिक्षा की ज़रूरत को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नेहरू का लगातार शिक्षा के प्रति आग्रह रहा है। खासतौर से अंग्रेजी और विज्ञान (English and Science) की शिक्षा के प्रति।

सरकार ने सेसेज फ़ॉर अजेस का इस्तेमाल किया

कार्यक्रम में गौरव वल्लभ पंत ने कहा कि छतीसगढ़ सरकार ने सेसेज फ़ॉर अजेस का इस्तेमाल किया। मिस कॉल का इस्तेमाल शिक्षा में किया। मोटरसाइकिल पर शिक्षा की उन्होंने तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे जानकर आश्चर्य हुआ यहां रूरल सेक्टर कम डिस्टर्ब हुआ है, जबकि देश मे सारे जगहों पर इसके विपरीत परिणाम है। मुख्यमंत्री बघेल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि दूरदर्शी मुख्यमंत्री है।

शिक्षकों की ट्रेनिंग पर जोर

वल्लभ पंत ने इस अवसर पर सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सेसेज में कुछ सेसेज कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी करवाई जाए, इसके अलावा ऑनलाइन एजुकेशन फ्यूचर ऑफ एडुकेशन है, इसे ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन संवाद को बढ़ाया जाए। शिक्षकों की ट्रेनिंग पर ध्यान कम होता है, इसके लिए ट्रेनिंग आउटकम ओरिएंटेड होना चाहिए।
(TNS)