हौसले को सलामः कर्ज से मुक्ति दिलाने बेटियों ने थाम लिया हल, मुख्यमंत्री ने की 4 लाख रुपए की मदद

बता दें कि अब यह परिवार कम संसाधनों के बावजूद पांच एकड़ में खेती करता है, लेकिन इसके लिए बेटियों को अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ अब भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। अखबारों में यह कहानी प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने कोंडागांव जिला कलेक्टर से परिवार की पूरी जानकारी मंगाई, ताकि उनकी मदद की जा सके।

रायपुर (Raipur)। परिवार में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां निर्मित हो जाती है, कि परिवार चलाने, अपनी संपत्ति को बचाने के लिए कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इस समय अगर परिवार साथ खड़ा हो जाए तो हौसला मजबूत हो जाता है और परिस्थितियां अनुकूल होती जाती हैं।

यहां ऐसी ही एक परिस्थिति का हम जिक्र कर रहे हैं। जहां बेटियों ने पिता के लिए अंगद की पैर की तरह दृढ़ निश्चय कर खेतों में उतरीं और उन्हें कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए हाथों में हल (plow) थाम लिया। मामला मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंचा और राहत की खबर मिली।

मीडिया से सीएम तक पहुंची मार्मिक खबर
मामला कोंडागांव जिले (Kondagaon district) के उमरगांव (Umargaon) के एक गरीब किसान (farmer) का है। कर्ज में डूबे पिता को खेत (field) बेचने से रोकने के लिए उनकी मदद के लिए दो बेटियों (daughters) ने बैलों की जगह खुद हल में जुत गए। यह मार्मिक घटना मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री (Chief Minister) भूपेश बघेल तक पहुंची तो वे भी हतप्रभ रह गए। मुख्यमंत्री बघेल ने तत्काल परिवार की मदद के लिए 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की।

पिता से बेटियों ने कहा अब इसी खेत से जिंदगी बदलेंगे
बता दें कि कोंडागांव जिले के उमरगांव के निवासी 22 साल की हेमबती और 18 साल की लखमी की कहानी अखबारों में प्रकाशित हुई थी। उनके पिता अमल साय गरीब किसान हैं। मां भी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। गरीबी की वजह से अमल साय अपनी बेटियों को पढ़ा नहीं पाए। परिवार के भरण-पोषण के लिए जब खेत बेचने की नौबत आ गई, तब बेटियों ने अपने पिता को ढांढस बंधाया। कहा कि आप हमारी बिल्कुल चिंता नहीं करें। अब हम आपकी मदद करेंगे। इसी खेत से हम जिंदगी बदलेंगे।

सीएम ने कलक्टर से मांगी थी किसान परिवार के स्थिति की रिपोर्ट
बेटियों की हिम्मत (daughters dare) देखकर पिता आत्मविश्वास से भर गया। बिटियों के मजबूत इरादे औरकड़ी मेहनत करते देख पिता का मन बदल गया। खेत बेचने का इरादा बदल दिया। खेती संभलने लगी। इधर राजीव गांधी किसान न्याय योजना से भी परिवार को मजबूती मिली। उन्हें उपज की अच्छी कीमत मिलने लगी। बता दें कि अब यह परिवार कम संसाधनों के बावजूद पांच एकड़ में खेती करता है, लेकिन इसके लिए बेटियों को अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ अब भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। अखबारों में यह कहानी प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री (Chief Minister) बघेल ने कोंडागांव जिला कलेक्टर (Collector) से परिवार की पूरी जानकारी मंगाई, ताकि उनकी मदद की जा सके।

(TNS)