रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़तालः डॉक्टरों ने कहा भार इतना है कि हम थक चुके हैं, अब इमरजेंसी सेवा बंद की जाएगी

रायपुर (raipur)। रेजिडेंट डॉक्टरों (resident doctor) पर इतना बोझ (burden) लाद दिया गया है कि वे परेशान (troubling) हो गए हैं। कम स्टाफ में पूरा काम करना पड़ रहा है। ओपीडी OPD, आपरेशन (operation), इमरजेंसी (emergency) में डटे रहना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में हमारी क्षमता पर असर पड़ रहा है। हमारी मांगे सुनी नहीं जा रही है। इसलिए हम मांगों (demand) को लेकर लगातार हड़ताल (strike) पर हैं।

चौथे दिन मंगलवार को भी जारी रही हड़ताल के दौरान डॉ. अमन अग्रवाल और डॉ. साधना दुबे ने बताया कि पहले दिन से ओपीडी बंद है। उसके बाद ऑपरेशन थियेटर बंद किया गया है। फिर भी मांगें नहीं मानी गई, तो इमरजेंसी सेवा बंद किया जाएगा किया जाएगा। वहीं नीट पीजी डिले होने पर पूरे देश में हड़ताल की गई।

तारीख नहीं काउंसलिंग चाहिए
इस दौरान डॉक्टर साधना दुबे ने बताया हमें किसी भी प्रकार की तारीख पर तारीख नहीं चाहिए। हमें सिर्फ और काउंसलिंग (counseling) चाहिए, जो पिछले 15 माह से नहीं हुआ है। मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में है। कोर्ट ने भी अगली सुनवाई 5 जनवरी को दी है और उसके बाद आगे की कब डेट मिल जाए ये भी नहीं पता। डॉक्टरों की कमी है दूसरी ओर काउंसलिंग नहीं होने से नए बैच नहीं आ रहे हैं तो डॉक्टर कहां से आएंगे। नए बैच नहीं आने से हम लोगों पर भार डबल हो गया है। पिछले एक साल से दबाव के बीच काम कर रहे हैं। हम लोग भी मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। थक गए हैं और व्यवस्था भी चरमरा गई है।

मांगें नहीं मानी गई तो इमरजेंसी सेवा होगी बंद
रेजिडेंट डॉक्टरों (resident doctor) की हड़ताल का आज चौथा दिन हैि। पहले दिन से ओपीडी बंद है। उसके बाद ऑपरेशन थियेटर बंद किया गया है, फिर भी मांगें नहीं मानी गई तो इमरजेंसी सेवा बंद की जाएगी. नीट पीजी डिले होने पर पूरे देश में हड़ताल किया गया है, छत्तीसगढ़ में लगभग 400 पीजी डॉक्टर हड़ताल में है. सेवा बंद करने से मरीज परेशान है। मरीजों की तरह हम भी परेशान हैं, दबाव परेशानी में कैसे सही इलाज कर पाएंगे।

बार-बार डेट बढ़ाने से पिछड़ा सत्र
चिकित्सकों ने बताया कि बार-बार डेट बढ़ाने से सत्र 15 माह पिछड़ गया है। 5 जनवरी 2021 के बाद 18 अप्रैल डिसाइड हुआ, फिर 11 सितंबर हुआ. जिसमें अंततः परीक्षा हुई। परीक्षा के बाद परिणाम एक माह बाद आया। उसके एक माह बाद काउंसलिंग आरंभ किया गया। काउंसलिंग आरंभ होते ही सुप्रीम कोर्ट में स्टे लगा। हेरिंग के लिए फिर सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिवाली का हवाला दिया गया फिर शीतकालीन सत्र से अब अगला हेरिंग 5 जनवरी को दिया गया है। काउंसलिंग नहीं होने से लगातार डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इसलिए हम चाहते हैं कि जल्द काउंसलिंग हो और नए बैच मिले।

(TNS)