रविंद्र संगीत और छत्तीसगढ़ के लोक गीतों को एक मंच पर दर्शाने की तैयारी

भिलाई (Bhilai)। गीतवितान कला केंद्र (Geetavitan Kala Kendra) के प्रतिनिधिमंडल (delegation) ने प्रदेश के संस्कृति मंत्री (Culture Minister) अमरजीत भगत से रायपुर (Raipur) में मुलाकात की। इस दौरान “गीतांजली छत्तीसगढ़ के झरोखों से” (“Gitanjali from the windows of Chhattisgarh”) अनूठे कार्यक्रम के बारे में विस्तार से अवगत कराया। ऐसे आयोजन को सुनकर मंत्री भगत ने सहर्ष अपने विभाग को यथोचित क्रियान्वन के लिए आदेशित कर पूर्ण सहयोग (cooperation) का आश्वासन (Assurance) दिया। वहीं ऐसे कार्यक्रम के लिए अपना मार्गदर्शन भी दिया।

संस्कृति मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रोग्राम मैनेजमेंट डायरेक्टर शुभेंदु बाग़ची, आर्गनाइजर मिथुन दास, उपाध्यक्ष रजनी सिन्हा, सुब्रोतो बिकास चौधुरी, बॉबी दास एवं इंद्रजीत पात्रा, मीडिया प्रभारी रचना श्रीवास्तव, प्रेमचंद साहू मौजूद थे।

मई 2022 को आयोजन

गीतवितान कला केंद्र की भास्वति बोस व अस्मिता बैनर्जी ने जानकारी दी कि रविंद्र संगीत और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के लोक गीतों को एक मंच पर दर्शाने की तैयारी है। मई 2022 को होने वाले आयोजन के लिए लोक संस्कृति मंडलियों (folk culture circles) से संपर्क कर रहे हैं। केंद्र के पदाधिकारियों ने रायपुर जाकर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत से मुलाकात कर आयोजन की जानकारी दी गई है। बोस व बैनर्जी ने बताया ऐसे आयोजन के लिए मंत्री जी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए राज्य शासन से पूरा सहयोग दिए जाने का आश्वासन दिए हैं।

गायन एवं कला के क्षेत्र में 30 साल से दे रहे सेवा
बता दें कि गीतवितान कला केंद्र भिलाई का गायन एवं कला (singing and art) के क्षेत्र में 30 साल से सेवा दे रहे हैं। इस बार संस्था ऐतिहासिक एवं उत्कृष्ट गायन प्रस्तुति गीतांजलि छत्तीसगढ़ के झरोखों से के माध्यम से प्रस्तुत करने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की भूमि पर पहली बार स्वर्णिम यादगार (golden memorabilia) स्थापित करने जा रहे है।

ये है आयोजन का उद्देश्य
इस आयोजन में जहां 200 अनुभवी व प्रतिष्ठित गायक-गायिकाओं (singers and singers) के कंठ स्वर एक साथ गूंजेगे, जिसकी मधुर प्रतिध्वनि का साक्षी पूरा छत्तीसगढ़ होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य (Program Objective) गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का हमारे छत्तीसगढ़ के साथ सुमधुर एवं आत्मिक संबंध पर प्रकाश डालना और दोनों प्रांतों को संगीत की झन्कार से एक सूत्र में बांध देना है।
(TNS)