चार दिन से हड़ताल पर फिजियोथेरेपी छात्र, विभाग ने मूंदी आँखें

वर्षों पुरानी मांगें पूरी ना होने को लेकर छात्रों में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का निर्णय ले लिया है।

फिजियोथेरेपी कॉलेज के बाहर धरने पर बैठे छात्र।


रायपुर।
हॉस्टल, स्टाइपेंड, कॉलेज में ओपीडी और पीजी कोर्स की मांग को लेकर शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज के छात्र पिछले चार दिनों से धरने पर हैं। बावजूद स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदे बैठा है। वर्षों पुरानी मांगें पूरी ना होने को लेकर छात्रों में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का निर्णय ले लिया है।

मांगों के संबंध में छात्रों ने बताया कि सत्र 2002 से शुरू हुए फिजियोथेरेपी कॉलेज में छात्रों के रहने के लिए आज तक हॉस्टल नहीं बनाया गया है। मांग करने पर जमीन चिह्नित तो की जाती है, लेकिन प्रशासन बाद में उसका उपयोग किसी और कार्य के लिए कर देता है। इधर फिजियोथेरेपी छात्र कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अलग ओपीडी की व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। ऐसे में प्रेक्टिकल करने के लिए उन्हें आंबेडकर अस्पताल जाना पड़ता है।

फिजियोथरेपी में ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स अब तक शुरू नहीं किए गए हैं। स्टाइपेंड भी 3500 रुपये ही छात्रों को मिलते हैं, जिसे बढ़ाने की योजना है। लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में चार अहम मांगें हैं, जो पिछले चार-पांच सालों से छात्र लगातार कर रहे हैं। लेकिन अब तक शासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती है। छात्र लगातार प्रदर्शन करते रहेंगे।

आधे मानव संसाधन से चल रहा फिजियोथेरेपी कॉलेज
प्रदेश के एकमात्र शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज में 19 वर्ष बाद भी आधे मैनपावर से काम चल रहा है। इसके चलते शिक्षा प्रभावित हो रही। 20 पीजी की सीटों को लेकर भी राज्य सरकार ने प्रस्ताव को लटका दिया है। शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की शुरुआत 2002 में हुई थी। इसमें 50 ग्रेजुएशन की सीटों के आधार पर ही पद स्वीकृत थे। इसमें भी शुरुआती समय में आधे पदों पर ही भर्ती की गई। अब करीब दो दशक होने को है। कॉलेज की स्थिति ऐसी ही है।

प्राध्यापकों के पद हैं रिक्त
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यहां पर प्राचार्य, प्राध्यापक फिजियाेथेरेपी, सहायक प्राध्यापक, प्रदर्शक, आक्यूपेशनल थेरेपिस्ट जैसे कई पद अब तक भरे नहीं गए हैं। इधर जरूरत के आधार पर आर्थोपेडिक, रिलैबिटेशन, न्यूरोलाजी, कार्डियो रेस्पिरेटरी चार विभागों में प्रत्येक में पांच-पांच पीजी सीटों की अनुमति देनी है। लेकिन पीजी सीटों के लिए पहले प्रोफेसर, एसोशिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों पर भर्ती होना जरूरी है। इसे लेकर भी प्रस्ताव भेजा गया है।
(TNS)