कर्तव्य में बरती लापरवाहीः बच्चों की जान पर आई, कलक्टर ने आश्रम आधीक्षक को किया निलंबित

जांच में पाया गया कि छात्रावास अधीक्षक के लगातार नदारद रहने की वजह से घायल बच्चों का इलाज घटना के 3 दिनों बाद भी शुरू नहीं हो सका, जिससे सहायक आयुक्त सहित आदिवासी विकास विभाग के आला अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है।

 

जशपुर। आदिम जाति कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित आश्रम के अधीक्षक ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है। इससे आश्रम में रहने वाले छोटे-छोटे बच्चों की जान पर आई है। खेल-खेल में किसी जंगली पौधे को छू लेने से बच्चों के हाथों में पौधे के जहर का विपरीत असर पड़ा है। इस लापरवाही पर कलक्टर ने नाराजगी जाहिर की है। कलक्टर ने आश्रम अधीक्षक को निलंबित करने का आदेश दिया है।

अधीक्षक की लापरवाही के कारण बच्चे किसी जंगली पौधे को छू लिए हैं, जिससे पौधे का जहर बच्चों में फैल गया है। उदासीनता और लापरवाही के कारण घायल बच्चों का उपचार घटना के 3 दिन बाद भी शुरू नहीं किया जा सका है। सभी बच्चे जहरीले पौधे की चपेट में आने से जख्मी हुए हैं।

बच्चों के हाथों में पड़ा फोड़ा
इस घटना से आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावास और आश्रम स्कूलों में कड़ी देखरेख और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम की पोल खुल गई है। जानकारी अनुसार भेलवा नाम के पौधे के दूध से बच्चों के शरीर में बड़े-बड़े फोड़े हो गए हैं, लेकिन रंगपुर पहाड़ी कोरवा बालक आश्रम के अधीक्षक ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे नाराज कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने निलंबित कर दिया है।

लापरवाह अधीक्षक का इंक्रीमेंट में रोका जाएगा
जानकारी अनुसार पहाड़ी कोरवा बालक आश्रम रंगपुर के 7 बच्चे जंगल की जहरीली वनस्पति के दुष्प्रभाव के जद में आ गए थे। अब लापरवाही बरतने वाले पहाड़ी कोरवा बालक आश्रम रंगपुर के अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कलेक्टर ने निलंबन और इंक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया है।

छात्रावास अधीक्षक रहते हां नदारद
जांच में पाया गया कि छात्रावास अधीक्षक के लगातार नदारद रहने की वजह से घायल बच्चों का इलाज घटना के 3 दिनों बाद भी शुरू नहीं हो सका, जिससे सहायक आयुक्त सहित आदिवासी विकास विभाग के आला अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है।

आश्रम स्कूल में है 50 बच्चे
बता दें कि बगीचा विकासखंड में 50 नन्हे बच्चों के इस आश्रम स्कूल में अधीक्षक की अनुपस्थिति के दौरान भृत्य द्वारा ही देखरेख की जाती है। यहां लगातार अधीक्षक के छात्रावास से बाहर रहने की शिकायतें उजागर होती रही हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता इसे बढ़ावा दे रहा है। उपचार के लिए परिजनों को जानकारी दी गई है।

(TNS)