नगरी दुबराज को मिला जीआइ टैग, जानिए यह क्या होता है और इससे क्या होगा फायदा

रायपुर। धमतरी के विकासखंड नगरी के किसानों को उनकी अपनी नगरी दुबराज धान किस्म को ब्रांड नेम मिल गया है। यह छत्तीसगढ़ की दूसरी फसल है, जिसे ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री टैग यानी जीआइ टैग दिया गया है। इसके पहले जीरा फूल धान की किस्म के लिए प्रदेश को जीआइ टैग मिल चुका है। सोमवार को ग्वालियर में आयोजित ज्योग्राफिकल इंडिकेशन कमेटी की बैठक में धान की इस किस्म को जीआइ टैग देने के लिए अनुमोदन किया गया है।

बताते चलें कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने नगरी दुबराज का प्रस्ताव भेजा था। कृषि विवि रायपुर के आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के प्रोफेसर व प्रमुख कृषि विज्ञानी डा. दीपक शर्मा भी ज्योग्राफिकल इंडिकेशन कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में नगरी दुबराज को ब्रांड नेम देने के लिए अनुमोदन कर दिया गया है।

चेन्नाई द्वारा गठित कमेटी में भारत के 10 विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा जांचा और परखा गया और नगरी दुबराज की नगरी में उत्पत्ति होने का प्रमाण स्वीकार कर लिया गया है। नगरी दुबराज की खासियत यह है कि यह चावल बहुत ही सुगंधित होता है और इसके दाने छोटे होते हैं। यह पकने के बाद बेहद नरम बनता है। एक एकड़ में अधिकतम छह क्विंटल तक उपज मिलती है। धान की ऊंचाई कम और 125 दिन में पकने की अवधि है।

किसानों को यह फायदा

जाआई टैग मिलने से किसानों को यह लाभ होगा कि अब इस नगरी दुबराज धान की किस्म को केवल नगरी के किसान ही उगा सकेंगे। इस टैग का इस्तेमाल किसी दूसरी जगह के व्यक्तियों के करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इससे इस फसल पर छत्तीसगढ़ के किसानों का एकाधिकार हो गया है। बताते चलें कि इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले वर्ष नगरी के किसानों को दुबराज की खुशबू लौटाने का वादा भी पूरा हो गया है।

जीआइ टैग इसलिए दिया जाता है 

भारतीय संसद ने साल 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशंस आफ गुड्स’ लागू किया था। इस आधार पर भारत के किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य, व्यक्ति या संगठन इत्यादि को दे दिया जाता है। वर्ल्ड इंटलैक्चुअल प्रापर्टी आर्गनाइजेशन के मुताबिक, जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी खास फसल, प्राकृतिक या कृत्रिम निर्मित उत्पाद को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है। यह बौद्धिक संपदा का अधिकार माना जाता है।