झीरम कांडः नए जांच आयोग का गठन, तीन बिंदुओं के साथ छः माह में देंगे रिपोर्ट

रायपुर। आठ साल पहले 25 मई 2013 को बस्तर (Bastar) में हुए झीरम घाटी कांड (Jhiram case) की नए सिरे से जांच के लिए राज्य शासन (state government) ने निर्णय लिया है। इसके लिए न्यायिक जांच आयोग ( Commission of Inquiry) में राज्य सरकार ने दो नए सदस्य हाईकोर्ट (High Court) के पूर्व न्यायाधीश और वर्तमान न्यायाधीश को शामिल किया है।

सामान्य प्रशासन विभाग (Department of General Adminstration) द्वारा गुरुवार को अधिसूचना (notification) जारी किया गया है। इसमें बताया गया कि नए जांच आयोग में सरकार ने पूर्व में किए जा रहे जांच में तीन नए बिंदुओं (new points) को शामिल करते हुए छह महीने में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने की बात कही है। वहीं जांच के दौरान तकनीकी विषय/बिन्दुओं पर आयोग किसी संस्था विशेषज्ञ (specialist) की सहायता ले सकेगा।

मई 2013 को खेला गया था खूनी खेल
बता दें कि 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी में नक्सलियों (Naxalite) द्वारा कांग्रेस (Congress) नेताओं के काफिले (convoy) पर खूनी खेल खेला गया था। इस नरसंहार की जांच के लिए पूर्व में बने जांच आयोग की हाल में मिली रिपोर्ट पर राज्य शासन ने आपत्ति (objection) की थी। घटना की नए सिरे से जांच के लिए नए आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (presiding justice) सतीश के. अग्निहोत्री होंगे। वहीं न्यायमूर्ति जी मिन्हाजुद्दीन सदस्य के तौर पर नियुक्त किए गए हैं।

जांच में ये बिंदु किए शामिल

सरकार ने इस जांच में तीन अन्य बिंदु शामिल किया है। वहीं जांच अवधि की सीमा 6 माह निर्धारित की गई है। जांच के नए बिन्दुओं में क्या घटना के पश्चात पीड़ितों को समुचित चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराई गई थी? वहीं ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिये क्या समुचित कदम उठाये गये थे? वहीं अन्य बिन्दु माननीय आयोग या राज्य शासन के पारिस्थितिक आवश्यकतानुसार निर्धारित किए जाएंगे, शामिल किया गया है।

सरकार ने कहा राज्यपाल को सौंपी रिपोर्ट है अधूरी
बता दें कि हाल में आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल (Governor) अनुसुइया उइके को सौंप दी थी। मुख्यमंत्री (Chief Minister) भूपेश बघेल ने रिपोर्ट को लेकर जानकारी दी थी कि आयोग के सचिव ने सरकार को पत्र लिख जांच को पूरी करने के लिए वक्त मांगा था। मांग को सरकार ने इंकार कर दिया था। इसके बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने इस अधूरी रिपोर्ट को राज्यपाल को सौंप दिया था।

पूर्व आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने और समय मांग था
राज्य शासन का कहना है कि पिछले जांच आयोग के सचिव ने 23 सितंबर 2021 को जांच पूरी नहीं होने का हवाला देते हुए समय वृद्धि की मांग की थी। इसके साथ ही 30 सितंबर 2021 को आयोग का कार्यकाल खत्म हो गया। वहीं आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार मिश्रा स्थानांतरित होकर आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदभार ग्रहण कर चुके हैं।
(TNS)