किसान हुए उग्रः पुल निर्माण के 11 साल बाद भी मुआवजे के लिए भटक रहे ग्रामीणों ने सड़क किया जाम

मामला देवभोग के कुम्हडई खुर्द और कुम्हडई कला का है। जहां के 28 किसान परिवारों ने 11 साल पहले तेल नदी पर पुल निर्माण के लिए शासन को अपनी जमीन दी थी। पर अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की दूसरी क़िस्त इतने सालों बाद भी नहीं मिलने से वे अब उग्र हो गए हैं।

गरियाबंद (Gariaband)। पुल निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन (land acquisition) का एक दशक बाद भी भुगतान नहीं हो पाया। जहां खेती करते थे उसका भी लाभ बंद हो गया। ऐसे में आर्थिक रूप से परेशान किसानों (farmers) ने मुआवजे (compensation) की मांग (demand) को लेकर सड़क पर धरने (picketing) में बैठ गए। इससे आवागमन बाधित हो गया है।

मामला देवभोग (Devbhog) के कुम्हडई खुर्द (kumhadai khurd) और कुम्हडई कला का है। जहां के 28 किसान परिवारों ने 11 साल पहले तेल नदी (Tel River) पर पुल निर्माण के लिए शासन को अपनी जमीन दी थी। पर अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की दूसरी क़िस्त इतने सालों बाद भी नहीं मिलने से वे अब उग्र हो गए हैं।

 

किसानों को मनाने की कवायद
मुआवजे की मांग को लेकर नाराज किसान आज एक बार फिर चक्का जाम कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। फिलहाल किसान मुआवजा राशि नहीं मिलने तक चक्काजाम की बात कह रहे हैं। इधर संबंधित अधिकारी किसानों को मनाने में लगे हुए हैं।

63 लाख की राशि प्रशासन के खजाने में जमा
पीड़ित किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के 11 साल बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसानों के मुताबिक पहली किस्त मिल चुकी है, मगर 63 लाख से अधिक की दूसरी क़िस्त जिला प्रशासन के खजाने में जमा हो जाने के बाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।

मुआवजा राशि के बदले पुनर्वास नीति
मामले में देवभोग एसडीएम SDM टीआर देवांगन की मानें तो किसानों के मुआवजे की दूसरी क़िस्त जारी हो चुकी है, मगर शासन के नियम-कायदे आड़े आने के कारण किसानों को राशि वितरण नहीं की जा सकी है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से मिले दिशा-निर्देश का हवाला देते हुए बताया कि किसानों को अब मुआवजा राशि के बदले पुनर्वास नीति के तहत अनुदान राशि दी जाएगी।

किसान अनुदान राशि लेने के लिए तैयार नहीं
इधर किसानों का कहना है कि वे शासन से अपना हक मांग रहे हैं ना की भीख। किसानों के अनुसार अनुदान राशि उनके लिए मुआवजा राशि की अपेक्षा ऊंट के मुंह में जीरा के समान होगी। भाजपा भी अब इस मामले में किसानों के साथ खड़ी नजर आ रही है। पूर्व संसदीय सचिव एवं भाजपा नेता गोवर्धन मांझी ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि जारी 63 लाख की राशि किसानों को वितरण करना चाहिए। मांझी ने जल्द ही किसानों को राशि नहीं मिली तो किसानों के साथ धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।

(TNS)