देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, आखिर क्या है नेशनल हेराल्ड और उस से जुड़ा विवाद

राहुल गांधी YIL में डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी गई

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तीरंदाज, डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नेशनल हेराल्ड के मामले में पूछताछ कर रही है । वहीं, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी अभी कोरोना की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। वो अब 23 जून को ईडी के समक्ष पेश होंगी। आखिर क्या है नेशनल हेराल्ड मामला जो आज कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। जानते हैं कैसे फस गए सोनिया और राहुल गांधी क्या है पूरा मामला।

क्या है नेशनल हेराल्ड से जुड़ा विवाद ?

पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को AJL (एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड) का गठन किया था। जिसका उद्देश्य समाचार पत्रों को अलग-अलग भाषाओं में  प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज और अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र प्रकाशित हुआ करते थे ।

पं. जवाहर लाल नेहरू की  AJL के गठन में प्रमिख भूमिका होते हुए भी कभी इसपर मालिकाना हक नहीं रहा। क्योंकि 5000 स्वतंत्रता सेनानी जो शेयर होल्डर भी थे, इस कंपनी को सपोर्ट कर रहे थे। 90 के दशक आते-आते ये अखबार घाटे में जाने लगे। AJL पर साल 2008 तक 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया। तब कंपनी ने समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं करने का फैसला किया। प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में आ गई। 2010 में घाटा होने पर इसकी होल्डिंग YIL (यंग इंडिया लिमिटेड) को ट्रांसफर कर दी गई।

YIL की स्थापना भी 2010 में हुई थी। राहुल गांधी YIL में डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी गई। कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास शेष 24 फीसदी हिस्सेदारी थी। शेयर ट्रांसफर होते ही AJL के 1057 शेयरधारक सामने आ गए। शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब YIL ने AJL का ‘अधिग्रहण’ किया तो उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई थी।

जानिए किन लोगो पर और क्या है आरोप

2012 देश के नामी वकील और भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पत्रकार सुमन दुबे, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। दावा किया कि YIL ने गलत तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को “अधिग्रहित” किया। सुब्रमण्यम ने कहा की यह अधिग्रहण  2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए किया गया था।

2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो ईडी ने इस मामले की जांच ईडी ने शुरू की। कार्रवाई के डर से सोनिया और राहुल गांधी  दोनों कोर्ट पहुंच गए। निचली अदालत ने इस मामले में  दोनों को 19 दिसंबर, 2015 को जमानत दे दी थी। 2016 में उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले के सभी पांच आरोपियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी थी।

सोनिया गांधी और राहुल गांधी को इसी मामले में पूछताछ के लिए  ईडी ने तलब किया था।  सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय ने कहा नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों अभी जमानत पर बाहर हैं। अगर ईडी को लगता है कि पूछताछ के दौरान राहुल जांच में सहयोग नहीं दे रहे हैं तो वह उन्हें हिरासत में ले सकती है। इसके बाद कोर्ट तय करेगा की  राहुल को  न्यायिक हिरासत में या ईडी की कस्टडी में भेजना है।