बिजली कंपनी में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद छत्‍तीसगढ़ में चीफ इंजीनियरों के तबादले का सिलसिला

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) में सात करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पिछले सप्ताह ही वितरण कंपनी के एमडी हर्ष गौतम ने इंटरनल ऑडिट में सात करोड़ रुपये की अनियमितता पकड़ने की जानकारी दी थी। यह गड़बड़ी राजनांदगांव, मस्तुरी, बिलासपुर के तिफरा जोन, नेहरूनगर जोन, मल्हार, पचपेड़ी और शिवरीनारायण के कार्यालय में पकड़ी गई है।

इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने बड़े पैमाने पर चीफ इंजीनियरों (सीई) का तबादला कर दिया है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यह नियमित-प्रशासनिक प्रक्रिया है, जबकि इंजीनियरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन ने अपनी छवि बचाने के लिए यह तबादले किए हैं। इसकी वजह से न केवल वितरण कंपनी, बल्कि अन्य सरकारी बिजली कंपनी के इंजीनियरों में भी नाराजगी है।

जिन लोगों का ट्रांसफर किया गया है, उनमें ट्रांसमिशन कंपनी में पदस्थ जेएस नेताम को रायपुर रीजन का ईडी बनाया गया है। रायपुर के मौजूदा ईडी आरके पाठक को कंपनी मुख्यालय में बतौर जीएम भेजा गया है। सीई (ओ एंड एम) एम. जामूलकर को दुर्ग रीजन का सीई बनाया गया है। बिलासपुर रीजन के ईडी भीम सिंह को मुख्यालय में ईडी (ओ एंड एम) बनाकर भेजा गया है।

दुर्ग में पदस्थ संजय पटेल को बिलासपुर रीजन का ईडी, एके तिर्की को सीई विजिलेंस बनाया गया है। तिर्की एलटी विजिलेंस संभालेंगे। विजिलेंस में पहले से पदस्थ सरोज तिवारी एचटी कनेक्‍शन देखेंगे। इसी तरह सीएम (एचआर) डीआर साहू को एमडी कार्यालय में पदस्थ किया गया है। अंबिकापुर में पदस्थ अतिरिक्त चीफ इंजीनियर एसके वर्मा को सीई (एआर) अंबिकापुर की जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, कंपनी ने यह भी बताया कि अधिकांश बड़ी अनियमितता पुराने समय की है, जिसमें वर्ष 2018-19 में 1.82 करोड़, वर्ष 2019-20 में 2.94 करोड़, वर्ष 2020-21 में 1.24 करोड़ और 2015-16 से 2017-18 के दौरान 43 लाख रुपये शामिल है। इस मामले में कंपनी ने छह सहायक अभियंता, पांच कनिष्ठ अभियंता, 15 कार्यालय सहायक और 13 अन्य कर्मचारियों के विरूद्ध निलंबन/विभागीय जांच की कार्रवाई की गई है।