भिलाई निगम चुनाव: कांग्रेस दे रही सरकार का हवाला तो भाजपा गिना रही खामियां, ऐसा हो रहा भिलाई में चुनाव प्रचार

Bhilai election campaign
Bhilai election campaign

भिलाई। नगरीय निकाय चुनाव के भिलाई नगर निगम चुनाव में प्रचार प्रसार का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी जहां प्रदेश में सरकार होने से विकास कार्यों में तेजी का हवाला दे रहे हैं वहीं भाजपा प्रत्याशी सरकार की खामियों को गिनाकर विकास की बात कर रहे हैं। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों के अपने अलग मुद्दे हैं जो भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए खतरा बने हुए हैं।

भिलाई निगम चुनाव में इस बार माहौल बन चुका है। पूरे एक साल की देरी से भिलाई निगम के चुनाव कराए जा रहे हैं। इस चुनाव में एक ओर जहां सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने कई दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतारा है वहीं भाजपा ने भी कोई कोरकसर नहीं छोड़ी। इन सबके बीच निर्दलीय प्रत्याशियों की एक अलग  लाइन है। इस सबके बीच मंगलवार से प्रचार प्रसार का काम तेज हो गया है। पार्टी प्रत्याशी सघन जनंसपर्क में जुट गए हैं तो निर्दलीय भी घर-घर जाकर अपने लिए समर्थन मांग रहे हैं।

विकास की बात कर रहे कांग्रेस प्रत्याशी
प्रचार प्रसार के दौरान यह देखने को मिल रहा है कांग्रेस प्रत्याशी लगातार विकास की बात कर रहे हैं। खुसीपार क्षेत्र के वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों द्वारा देवेन्द्र यादव के नाम पर वोट मांगा जा रहा है। क्षेत्र के विकास का हवाला देकर इस क्षेत्र में मतदाताओं को साधने की कोशिश हो रही है। वहीं टाउनशिप में वोटरों के बीच कांग्रेस प्रत्याशी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने से निकायों में भी कांग्रेस को लाने की बात कह रहे हैं।

भाजपा के पास दिख रही मुद्दो की कमी
इधर भाजपा प्रत्याशियों के पास मुद्दों की कमी साफ देखी जा रही है। प्रचार प्रसार के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदेश सरकार की खामियों को गिनाने का प्रयास कर रहे हैं। वोटरों को लुभाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं। एक वार्ड में तो भाजपा प्रत्याशी द्वारा लोगों को अंडे व दूध बांटा जा रहा है। महिलाओं को श्रृंगार सामग्री देकर भी रिझाने का प्रयास किया जा रहा है।

विकास के मुद्दे पर निर्दलीय
वहीं निर्दलीय प्रत्याशी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी वार्डों में पूरे दमखम के साथ डटे हुए हैं। निर्दलियों में ऐसे चेहरे भी हैं जो पार्टी टिकट न मिलने से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे प्रत्याशियों का पलड़ा पार्टी प्रत्याशियों पर भारी है। स्थानीय चेहरा होने व लगातार पार्षद रहे ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।