छत्तीसगढ़ में पैर जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी की महिला नेत्री निकली दंगाई, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

महिला नेत्री के साथ ही घटना में शामिल रहे 17 लोगों को सात से 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है। मामले में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

आम आदमी पार्टी की नेता निशा सिंह, जिन्हें कोर्ट ने सजा सुनाई है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पैर जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी को गुरुवार को जोर का झटका लगा है। पार्टी में नंबर दो की पोजीशन रखने वाले मनीष सिसोदिया की करीबी पूर्व पार्षद निशा सिंह को कोर्ट ने दंगाई माना है। गुरुग्राम से आम आदमी पार्टी (आप) की इस पूर्व महिला पार्षद सहित अन्य को अदालत ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया है।

यह सजा हरियाणा विकास प्राधिकरण (हुडा) की टीम पर साल 2015 को हमला किए जाने के मामले में सुनाई गई है। निशा सिंह के साथ ही घटना में शामिल रहे 17 लोगों को सात से 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है। मामले में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

निशा पर आरोप था कि उन्होंने 2015 में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हमला करने और पथराव करने के लिए भीड़ को उकसाया था। इसके अलावा पुलिस टीमों पर पेट्रोल बम और एलपीजी सिलेंडर भी फेंके गए थे, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक मजिस्ट्रेट और 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

गुरुग्राम कोर्ट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोना सिंह ने गुरुवार को 10 दोषियों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जबकि सात को 10 साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने निशा सिंह सहित सभी 10 महिलाओं पर 10,000 रुपए और अन्य पर 20,000 रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में जेल की अवधि दो से तीन साल तक बढ़ाई जाएगी।

अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अभियुक्तों द्वारा सरकारी अधिकारियों को चोट पहुंचाना एक गंभीर चूक है, लेकिन यह मानने का कोई कारण नहीं है कि उन्हें ठीक या पुनर्वास नहीं किया जा सकता है और उनके द्वारा हिंसा के आपराधिक कृत्य जारी हैं। समाज के लिए खतरा होने की संभावना है।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) की आवश्यकता को पूरा करने के अलावा सभी आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप सभी आरोपियों को इस धारा के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया गया है।

लंदन से एमबीए, गूगल में नौकरी और अब जेल
पूर्व पार्षद निशा सिंह ने मुंबई यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद लंदन बिजनेस स्कूल से MBA किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने गूगल जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में भी काम किया। हालांकि, उन्होंने राजनीति में आने के लिए यह नौकरी छोड़ दी। 2011 में निशा ने निर्दलीय के रूप में गुरुग्राम नगर निगम का चुनाव लड़ा और वार्ड नंबर 30 से पार्षद चुनी गईं। हालांकि, बाद में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गईं और 2016 तक पार्षद रहीं।